MSP क्या है ? जानिए क्यों कर रहे है किसान आंदोलन।

MSP क्या है ? जानिए क्यों कर रहे है किसान आंदोलन।

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका आपके अपने ब्लॉग पर। आज हम वर्तमान में चर्चित MSP Kya Hai ? के बारे में बात करने वाले हैं ताकि सभी लोगों को msp के बारे में हिंदी में पता लग सके और सभी भाई किसान भाइयों को सपोर्ट कर सके। हम समाचार पत्रों, टीवी चैनल्स और internet आदि हर जगह पर यही बात सुन रहे हैं की किसानो ने हड़ताल कर रखी है और रोड पर अनशन देकर बैठे हुए हैं।

आखिर एमएसपी का ऐसा क्या मुद्दा है जो किसान के लिए इतनी बड़ी बात है जिसकी वजह से उन्हें रोड पर भूखा प्यासा रहना पड़ रहा है। तो सबसे पहले हम msp kya hota hai ? या फिर आप बोल सकते है msp bill kya hai ?  के बारे में जान लेते हैं जिससे आपको समझ आ सके। दोस्तों हम सब को किसान की सहायता करनी होगी क्यूंकि उन्हीं की वजह से हमे और हमारे अपनों को खाने के लिए खाना मिल पाता है।

वैसे तो यह MSP वर्तमान में हर किसी के जुबान पर है क्यूंकि जहाँ देखो किसान रोड पर अनशन देते हुए नजर आ जाते हैं। इसलिए सोचा आप सब के साथ msp से सम्बंधित बातों पर चर्चा करलु क्यूंकि बहुत से लोगों को इसका ज्ञान होगा और बहुत से लोगों को इसका बिलकुल बी ज्ञान नहीं होगा।

इसलिए आप सब के लिए msp से सम्बंधित लेख लिखने का सोचा। चलिए अब विस्तार से हम जान लेते हैं और आप यह लेख अंत तक जरूर पढियेगा।

MSP Kya Hai ? msp meaning in hindi

सरकार द्वारा किसान की फसलों के लिए एक न्यूनतम मूल्य निर्धारित किया गया है जिसे हम MSP कहते हैं। यह एक तरह की गारंटी होती है जो किसान की फसलों के लिए होती है। गारंटी कहने का मतलब यहाँ यह है की किसान को उनकी फसल के लिए फिक्स्ड दाम दिया जाता है।

जब किसानों को मंडियों में अपनी फसल के ज्यादा पैसे या MSP निर्धारित मूल्य नहीं मिलते हैं तो सरकार द्वारा किसानों की फसलों को MSP के दामों पर खरीद लिया जाता है। इसका सीधा फायदा किसानों को मिलता है।

जब मंडी में भाव का उतार चढ़ाव होता है तो किसानों को एमएसपी की वजह से परेशान नहीं होना पड़ता है क्यूंकि सरकार निर्धारित मूल्य पर अनाज को खरीद लेती है। MSP का फायदा तो बहुत है क्यूंकि किसानों को दर-दर भटकने की आवश्यकता नहीं होती है। वह सीधे सरकारी संस्था पर जाकर अपना अनाज बेच सकते है।

MSP full form in hindi ?

दोस्तों अब आपको बताते है msp का फुलफॉर्म MSP का फुलफॉर्म न्यूनतम समर्थन मूल्य या मिनिमम सपोर्ट प्राइस (“Minimum Support Price”)होता है। यह पूरी तरह से किसान की फसलों के लिए गारंटी का काम करती है। एमएसपी के कारण किसानो को नुक्सान से बचाया जाता है।

MSP के अंतर्गत सरकार किसानों से उनकी फसल को खरीद लेती है जिससे उनको मंडी के उतार चढ़ाव भाव से नुक्सान भी नहीं होता है।

MSP ki shuruaat kab hui ?

लगभग 60 वर्ष पहले अर्थात आजादी के बाद किसान को परेशानियों का सामना करना पड़ता था क्यूंकि जब उनकी फसल भारी मात्रा में हो जाती थी तो उनको उसके अच्छे भाव नहीं मिल पाते थे। जिसकी वजह से उनकी लागत की पूर्ती भी नहीं हो पाती थी और कर्ज में भी दबना पड़ जाता था।

इसी कारण की वजह से किसानों ने आंदोलन करना शुरू कर दिया था और आज भी करते आ रहे हैं। जब किसानों ने लगातार आंदोलन किया था तो तब L K Jha के नेतृत्व में एक समिति को बनाया गय। जिसका कार्य अनाज के भाव को एक सामान अर्थात तय करने का था।

इस समिति का गठन 1 अगस्त 1964 को किया गया था। उस समय लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री हुआ करते थे। जिन्होंने देश और किसानों के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किये।

MSP ke fayde

1 – एमएसपी के द्वारा किसानों में नयी नाकनीकी का विकास होता है। जिसकी वजह से किसानो के बीच एमएसपी लोकप्रिय रहती है।

2 – MSP के द्वारा निर्धन व्यक्तियों को सहायता मिल पाती है।

3 – एमएसपी के द्वारा किसानों को उनकी फसलों के लिए उचित मूल्य मिल पाता है।

4 – MSP के द्वारा किसान को जो निर्धारित मूल्य मिलता है उससे वह अपनी खेती हो और अच्छे से कर पाते हैं।

5 – MSP की वजह से मंडियों में भाव भी सामान्य बना रहता है।

MSP को कौन तय करता है ?

किसानो के लिए एमएसपी को तय करने का कार्य कृषि लागत एवं मूल्य आयोग को दिया गया है। यह संस्था कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आती है और पहले के समय में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग को कृषि मूल्य के नाम से जाना जाता था। समय के अनुसार इसके साथ लागत को भी जोड़ दिया गया जिसकी वजह से इसका पूरा नाम कृषि लागत एवं मूल्य आयोग रख दिया गया।

इसके अंतर्गत अनेक फसलों का न्यूनतम मूल्य निर्धारित किया जाता है। कुछ फसलों को दूसरे आयोग सँभालते हैं जैसे गन्ना फसल का एमएसपी तय करने के लिए गन्ना आयोग बनाया गया है।

कितनी फसलों पर दिया जाता है MSP ?

आपको बता दे की MSP का गठन होने के बाद सबसे पहले गेहूं पर MSP को तय किया गया था। जिसकी वजह से सभी किसानों ने गेहूं की फसल करना आरम्भ कर दिया। जिसकी वजह से बाकी फसलों का उत्पादन कम होने लगा। इस बात को देखते हुए सरकार ने कुछ और फसलों पर भी एमएसपी लागू कर दिया था।

फसलें जैसे तिलहन, दलहन, धान पर भी एमएसपी को निर्धारित कर दिया। जिसकी वजह से किसानो ने गेहूं के साथ-साथ अन्य फसलों का भी उगाना शुरू कर दिया।

वर्तमान में जाइ, जौ, बाजरा, मक्का, गेहूं, धान, चना, अरहर, मसूर, उड़द, मूंग सोयाबीन, सरसों, शीशम, गन्ना, सूरजमुखी, कपास, जूट के साथ-साथ लबभग २० से अधिक फसलों पर MSP दिया जाता है।

फ़िलहाल किसानों ने देश में इसी लिए हड़ताल किया हुआ है। जिसकी वजह से उन्हें msp लागत कीमत पर फसलों का मूल्य मिल पाए। दोस्तों शायद अब आपको पूरी तरह समझ आ चूका होगा की msp kya hai इसलिए आप सब किसान भाइयों को जरूर सपोर्ट करें।

MSP कैसे तय होती है ?

दोस्तों MSP तय करने की प्रक्रिया तो वैसे बहुत लम्बी होती है। चलिए अब हम यहाँ समझ भी लेते है की एमएसपी को कैसे तय किया जाता है।

एमएसपी को तय करने के लिए आयोग अलग-अलग स्थानों में अपनी टीम को भेजकर आंकड़े इकठ्ठा करवाते हैं। जैसे की प्रति हेक्टेयर लागत कितनी है, सरकारी एजेंसियों की स्टोरेज क्षमता कितनी है, खेती के दौरान आने वाला खर्चा कितना है, वैश्विक मंडी में उसकी उपलब्धता और मांग कितनी है आदि।

यह कार्य पूरा हो जाने के बाद विशेषज्ञ टीम को अगला कार्य सौंपा जाता है जो इकठ्ठा किये गए आंकड़ों के अनुसार सुझाव लेती है और अंत में फैसला लेने के लिए कैबिनेट समिति को कार्य सौंप दिया जाता है।

इस तरह से एमएसपी को तय किया जाता है। दोस्तों अबतक एमएसपी से सम्बंधित विभिन बातों को हमने आपके समक्ष रखा है। आपको समझ आ गया होगा।

अंतिम शब्द,

दोस्तों आज हमने MSP Kya Hai के बारे में विभिन जानकारियों का साझा किया है।और msp का मतलब क्या है ? उम्मीद करते हैं की आपको पूरी तरह से एमएसपी का ज्ञान हो चुका होगा। लेकिन फिर भी आप कुछ पूछना चाहते हैं तो हम कम्मेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

दोस्तों यह लेख आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों को जरूर शेयर करें। धान्यवाद।